जब वी.पी. सिंह ने वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली, तो उन्होंने देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाया। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले संगठनों, जैसे कि डी.आर.आई. (डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) और आयकर विभाग ने उद्योगपतियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी, जिससे कई काले कारनामे उजागर होने लगे। वी.पी. सिंह ने न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध छेड़ा, बल्कि उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि जिन उद्योगपतियों के काले धन से देश का नुकसान हो रहा था, उन्हें बेनकाब किया जाए।
मुख्यमंत्री बनने के बाद भी झोपड़ी में रहा था मुख्यमंत्री?
"एक गरीब नाई परिवार में जन्मे कर्पूरी ठाकुर, जिन्होंने दो बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन जिनकी ईमानदारी और सादगी की मिसाल आज भी राजनीति में दी जाती है। उनके लिए मुख्यमंत्री का पद जनसेवा का माध्यम था, न कि विलासिता का साधन।" दो बार बिहार का मुख्यमंत्री रहने के बावजूद गरीब नाई परिवार में जनमे कर्पूरी ठाकुर का न मन बदला और न जीवन। वे फटा कुर्ता धोती पहनकर रिक्शे से मुख्यमंत्री कार्यालय से अपने घर आते-जाते दिख जाते थे। ले मेरा बेटा मुख्यमंत्री बन गया हो लेकिन मेरे लिए वह अब भी बेरोजगार है। वह मुझे पैसे नहीं भेजता। कर्पूरी ठाकुर की फकीरी के कई किस्से हैं जो आज भी राजनीति में एक मिसाल हैं। कर्पूरी ठाकुर का जन्म आज से 100 साल पहले भारत में ब्रिटिश शासन काल के दौरान समस्तीपुर के एक गांव पितौंझिया में नाई जाति के परिवार में हुआ था। अब कर्पूरी ठाकुर की जन्मस्थली होने के कारण इस गांव को कर्पूरीग्राम कहा जाता है। कर्पूरी ठाकुर समाजवाद के सच्चे सिपाही थे। केवल सत्रह साल की उम्र में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल गए। देश की आजादी वे लोकनायक जेपी और समाजव...
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