“हरियाणा 2024: कांग्रेस की लहर, फिर भी सत्ता क्यों नहीं?”
“हरियाणा 2024: कांग्रेस की लहर, फिर भी सत्ता क्यों नहीं?”
Analytical Narrative)
नमस्कार दोस्तों,
आप देख रहे हैं Bharat Election Watch
और मैं हूँ कुलदीप खंडेलवाल।
आज हम बात करेंगे हरियाणा की उस राजनीतिक पहेली की,
जिसने 2024 में सबको चौंका दिया।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने
हरियाणा की 10 में से 5 सीटें जीत लीं।
बीजेपी का क्लीन स्वीप टूट गया।
एंटी-इन्कम्बेंसी साफ दिखी।
लेकिन…
कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव हुए
और वही कांग्रेस सत्ता से बाहर रह गई।
तो सवाल उठता है—
जब लहर थी,
तो सत्ता क्यों नहीं मिली?
आज इसी सवाल की परतें खोलेंगे।
🧭 PART 1: 2019 बनाम 2024 — क्या बदला? (0:45 – 2:00)
दोस्तों,
2019 में हरियाणा पूरी तरह भगवा हो गया था।
10 की 10 सीटें बीजेपी।
मोदी लहर चरम पर।
विपक्ष बिखरा हुआ।
लेकिन 2024 आते-आते तस्वीर बदल चुकी थी।
-
किसान आंदोलन
-
बेरोज़गारी
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पेपर लीक
-
10 साल की सत्ता की थकान
इन सबने बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाया।
नतीजा?
बीजेपी 10 से 5 पर आ गई।
कांग्रेस शून्य से 5 पर पहुँच गई।
यानी हवा बदली थी।
लेकिन तूफान नहीं आया था।
🌾 PART 2: कांग्रेस ने 5 सीटें कैसे जीत लीं? (2:00 – 4:00)
अब सवाल ये है कि
कांग्रेस अचानक मजबूत कैसे हो गई?
पहला कारण — किसान आंदोलन
हरियाणा का ग्रामीण इलाका बीजेपी से नाराज़ था।
जाट और किसान समुदाय में गुस्सा था।
यह नाराज़गी सीधे वोट में बदली।
दूसरा कारण — जाट और दलित वोटों का आंशिक ध्रुवीकरण
2019 में जाट वोट बिखरा हुआ था।
2024 में वो काफी हद तक कांग्रेस के साथ आया।
दलित वोटों में भी कांग्रेस की वापसी दिखी।
तीसरा कारण — कुछ सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों की कमजोरी
हर सीट पर मोदी फैक्टर था।
लेकिन स्थानीय उम्मीदवार कमजोर थे।
गुटबाज़ी थी।
जमीनी संपर्क नहीं था।
कांग्रेस ने इसका फायदा उठाया।
चौथा कारण — एंटी-इन्कम्बेंसी
10 साल बाद
सरकार से थकान आ ही जाती है।
यह थकान लोकसभा में
कांग्रेस के पक्ष में गई।
❗ PART 3: फिर विधानसभा में कांग्रेस क्यों हार गई? (4:00 – 6:30)
अब आते हैं असली सवाल पर।
जब लोकसभा में जीत मिली,
तो विधानसभा में हार क्यों हुई?
पहली बड़ी वजह — लोकसभा और विधानसभा अलग चुनाव होते हैं
लोकसभा में वोट मोदी के खिलाफ गया।
विधानसभा में वोट स्थानीय उम्मीदवार पर गया।
मतदाता ने कहा—
“दिल्ली में विरोध,
लेकिन चंडीगढ़ में भरोसा।”
दूसरी वजह — कांग्रेस की गुटबाज़ी
हुड्डा बनाम सैलजा।
पार्टी अंदर से टूटी हुई थी।
संदेश उलझा हुआ था।
किसी को नहीं पता था—
मुख्यमंत्री चेहरा कौन है?
तीसरी वजह — टिकट वितरण में गड़बड़ी
कई सीटों पर
गलत उम्मीदवार उतारे गए।
पुराने नेताओं को काट दिया गया।
नए चेहरों पर ज़मीनी पकड़ नहीं थी।
चौथी वजह — बागी उम्मीदवार
जहाँ टिकट नहीं मिला,
वहाँ कांग्रेस के ही नेता
निर्दलीय खड़े हो गए।
उन्होंने 5–10 हजार वोट काटे।
और बीजेपी मामूली अंतर से जीत गई।
पाँचवीं वजह — AAP से गठबंधन नहीं हुआ
अगर AAP साथ होती,
तो कई सीटों पर
बीजेपी हार सकती थी।
लेकिन कांग्रेस ने
“अकेले लड़ेंगे” का दांव खेला
और नुकसान उठा लिया।
🧩 PART 4: बीजेपी ने सत्ता कैसे बचा ली? (6:30 – 8:30)
अब बीजेपी की बात करते हैं।
पहला कदम — मुख्यमंत्री बदलना
लोकसभा नतीजों के बाद
बीजेपी ने साफ संदेश दिया—
“हम जनता की नाराज़गी समझते हैं।”
नया चेहरा।
नई शुरुआत का नैरेटिव।
दूसरा — गैर-जाट और शहरी वोटों पर फोकस
बीजेपी ने अपना
कोर वोट बैंक नहीं छोड़ा।
ओबीसी
गैर-जाट
शहरी मध्यम वर्ग
इन सबको एकजुट रखा।
तीसरा — बूथ लेवल मैनेजमेंट
बीजेपी की असली ताकत यही है।
हर बूथ पर कार्यकर्ता।
डेटा।
मोबिलाइजेशन।
कांग्रेस इस मोर्चे पर
बहुत पीछे थी।
चौथा — वोटों का बेहतर वितरण
कांग्रेस को ज़्यादा वोट मिले,
लेकिन गलत सीटों पर।
बीजेपी को कम वोट मिले,
लेकिन सही सीटों पर।
यही होता है
“सत्ता का गणित”।
🧠 PART 5: असली सबक क्या है? (8:30 – 9:30)
तो दोस्तों,
हरियाणा 2024 हमें क्या सिखाता है?
1️⃣ लहर ज़रूरी है,
लेकिन संगठन उससे ज़्यादा ज़रूरी है।
2️⃣ लोकसभा और विधानसभा अलग चुनाव होते हैं।
3️⃣ टिकट गलत होंगे,
तो लहर भी बेकार जाएगी।
4️⃣ बागी नेता चुनाव हरवा सकते हैं।
5️⃣ वोट प्रतिशत से ज़्यादा
सीटों का गणित अहम होता है।
दोस्तों,
हरियाणा 2024 सिर्फ़ एक राज्य की कहानी नहीं है।
यह कहानी है—
कि लोकतंत्र में
वोट मिलना और सत्ता मिलना
दो अलग बातें हैं।
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और कमेंट में बताइए—
क्या कांग्रेस की हार उसकी गलती थी
या बीजेपी की रणनीति की जीत?
मैं हूँ कुलदीप खंडेलवाल,
आप देख रहे हैं Bharat Election Watch।
फिर मिलेंगे
एक नए चुनावी विश्लेषण के साथ।

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