दिल्ली विधानसभा चुनाव: अवध ओझा के सामने वीरेंद्र सचदेवा, मनीष सिसोदिया जंगपुरा से लड़ेंगे चुनाव

 दिल्ली विधानसभा चुनाव: अवध ओझा के सामने वीरेंद्र सचदेवा, मनीष सिसोदिया जंगपुरा से लड़ेंगे चुनाव

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव के तहत, पटपड़गंज विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक और पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनकी जगह मशहूर यूपीएससी शिक्षक अवध ओझा को पटपड़गंज से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, मनीष सिसोदिया को जंगपुरा विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है।

आप की रणनीति में बदलाव

आम आदमी पार्टी ने 10 साल की सत्ता विरोधी लहर (एंटी इनकंबेंसी), दिग्गज नेताओं की गिरफ्तारी से उपजे व्यवधान, और भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए अपने चुनावी दांव-पेंच बदले हैं। पार्टी ने इस बार कई मौजूदा विधायकों को हटाने और कुछ को नए निर्वाचन क्षेत्रों में भेजने का फैसला किया है।

पटपड़गंज सीट पर अवध ओझा को टिकट देना पार्टी के लिए एक साहसिक कदम माना जा रहा है। यूपीएससी की तैयारी करवाने वाले शिक्षक के रूप में प्रसिद्ध अवध ओझा युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं और उनकी छवि साफ-सुथरी मानी जाती है।

बीजेपी की रणनीति और वीरेंद्र सचदेवा का नाम

पटपड़गंज सीट पर अवध ओझा के सामने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने वरिष्ठ नेता वीरेंद्र सचदेवा को उतारने की तैयारी की है। सचदेवा पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं में से एक हैं। बीजेपी ने इस बार दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारने की योजना बनाई है ताकि आम आदमी पार्टी को कड़ी टक्कर दी जा सके।

क्या कहते हैं राजनीतिक समीक्षक?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पटपड़गंज सीट पर यह मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। एक तरफ अवध ओझा पहली बार चुनावी मैदान में उतरेंगे, वहीं दूसरी ओर वीरेंद्र सचदेवा जैसे अनुभवी नेता से उनका सामना होगा।

मनीष सिसोदिया का जंगपुरा से चुनाव लड़ना भी एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह बदलाव पार्टी की रणनीति का हिस्सा है, जहां वरिष्ठ नेताओं को नई जगहों पर भेजकर स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की जा रही है।

निष्कर्ष

दिल्ली विधानसभा चुनाव इस बार नई रणनीतियों और दिग्गज नेताओं के बीच संघर्ष का गवाह बनेगा। पटपड़गंज सीट पर अवध ओझा बनाम वीरेंद्र सचदेवा का मुकाबला और जंगपुरा में मनीष सिसोदिया की उपस्थिति इन चुनावों को और रोचक बना सकती है।

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